तुम आसमाँ तलक एक बादल हो
और मैं एक बहती नदी।
मैं खुदमे स्पर्श तो तुम्हारा ही देखता हूँ
पर तुम्हें करीब से देखु कभी
ये मन्नत है मेरी।
ज़िन्दगी में वैसे कईं लक्षय बाकी हैं अभी
मैं बस इसी ख्वाब में बहे जा रहा हु
कि शायद कभी किसी समंदर में गिर कर
मेरा कोई अंश किसी क्षितिज से जा मिलेगा
उस दिन देखना तुम नीचे,पानी मे एक नया रंग खिलेगा।
हवा को नजाने मिझे केस बैर है
तुम्हे शांत एक रूप में रहने नहीं देती।
तेज़ वारिशों के बीच उफनते हुए
चट्टानों से टकराते हुए , उन्ही बूंदों में सिमट कर
तुम में मिल जाने को अब जी करता है।
तुम तो हवाओं के संग बह जाती हो
उन्ही के रंग में , उन्ही के ढंग से।
क्या हम मिल सकते हैं कभी हवाओं से परे ?
क्या साथ चल सकत्व हैं कुछ कदम ?
मुझे सिर्फ बहना ही नहीं , और भी बोहोत कुछ आता है।
काश के बस तुम आओ कभी मेरे किनारों पे
मैं कोशिश पूरी करूँगा कि सैलाब न बढ़े।
जिस मंज़र के लिए मैं तरसता रहा उम्र भर
उस हसीं मंज़र का मुझे दीदार करने देना
बस इतनी सि गुज़ारिश है ओ हसीं , तु मुझे प्यार करने देना।
और मैं एक बहती नदी।
मैं खुदमे स्पर्श तो तुम्हारा ही देखता हूँ
पर तुम्हें करीब से देखु कभी
ये मन्नत है मेरी।
ज़िन्दगी में वैसे कईं लक्षय बाकी हैं अभी
मैं बस इसी ख्वाब में बहे जा रहा हु
कि शायद कभी किसी समंदर में गिर कर
मेरा कोई अंश किसी क्षितिज से जा मिलेगा
उस दिन देखना तुम नीचे,पानी मे एक नया रंग खिलेगा।
हवा को नजाने मिझे केस बैर है
तुम्हे शांत एक रूप में रहने नहीं देती।
तेज़ वारिशों के बीच उफनते हुए
चट्टानों से टकराते हुए , उन्ही बूंदों में सिमट कर
तुम में मिल जाने को अब जी करता है।
तुम तो हवाओं के संग बह जाती हो
उन्ही के रंग में , उन्ही के ढंग से।
क्या हम मिल सकते हैं कभी हवाओं से परे ?
क्या साथ चल सकत्व हैं कुछ कदम ?
मुझे सिर्फ बहना ही नहीं , और भी बोहोत कुछ आता है।
काश के बस तुम आओ कभी मेरे किनारों पे
मैं कोशिश पूरी करूँगा कि सैलाब न बढ़े।
जिस मंज़र के लिए मैं तरसता रहा उम्र भर
उस हसीं मंज़र का मुझे दीदार करने देना
बस इतनी सि गुज़ारिश है ओ हसीं , तु मुझे प्यार करने देना।