Sunday, 18 September 2016

गुज़र जाएगी यह रात भी

हर रात की तरह,
गुज़र जाएगी यह रात भी। 
बस मेरे खयालो में होंगी तुम, 
और यह चेहरा तुम्हारा,
हमेशा की तरह कुछ धुंदला सा। 

नज़र आती है तो बस, 
यें ज़ुल्फ़े तुम्हारी,
जिन्हें ये ठंडी लहर सहला रही है। 
लगता है मेरी तरह,
इस फ़िज़ा को भी तुमसे प्यार हो गया। 

इस कदर छाई है यह धुंद,
कि तुम्हारा एक स्पर्श भी अब गवांरा न रहा। 
सर्द मौसम कि इस शाम में,
कहीं से तो चली आओ तुम। 

बस एक जवाब मुझे दे जाओ,
कि हाँ....तुम यहीं हो मेरे आस पास। 
तसल्ली सी हो जाएगी इस दिल को,
और फिर हर रात की तरह,
गुज़र जायेगी यह रात भी।  


Copyright @ Pushpam Singhal 2016

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